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विश्वावसु संवत्सर - 2012-13

कल्पादि से गत वर्ष 1972949113, सृष्टि संवत्‌ 1955885113, श्रीविक्रम संवत्‌ शक संवत्‌ 1934, श्रीकृष्णजन्म संवत्‌ 5248, कलि-संवत्‌ 5113, सप्तर्षि-संवत्‌ 5088, श्री जैन महावीर निर्वाण संवत्‌ 2537-38, श्रीबुद्ध संवत्‌ 2635-36, हिजरी सन्‌ 1433-34, ‌सली सन्‌ 1419-20, ईस्वी सन्‌ 2012-2013।


वर्ष का मंत्रिमंडल
विभाग मंत्री
राजा - शुक्र
मंत्री - शुक्र
अनाज मंत्रालय - शनि
वर्षा मंत्रालय - गुरु
खरीफ फसल मंत्रालय - चन्द्रमा ---- more

Printer Friendly VersionEmail The Author 7:52 PM | #ज्योतिष

होलाष्टक में निषेध कार्य

होलाष्टक में कार्य निषेध (Things that shouldn't be done during Holashtak)



होलाष्टक मुख्य रुप से पंजाब और उत्तरी भारत में मनाया जाता है | होलाष्टक के दिन से एक ओर जहां उपरोक्त कार्यो का प्रारम्भ होता है | वहीं कुछ कार्य ऎसे भी है जिन्हें इस दिन से नहीं किया जाता है | यह निषेध अवधि होलाष्टक के दिन से लेकर होलिका दहन के दिन तक रहती है | अपने नाम के अनुसार होलाष्टक होली के ठिक आठ दिन पूर्व शुरु हो जाते है ---- more

Printer Friendly VersionEmail The Author 10:55 AM | #ज्योतिष

गुरु ग्रह अनुकूल करने के लाल क

गुरु ग्रह को अनुकूल करने के लिए लाल किताब के टोटके



1. भोजन में केसर का प्रयोग करें और स्नान के पश्चात प्रतिदिन नाभि तथा मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं I

2. साधु, ब्राह्मण एवं पीपल के वृक्ष की पूजा- अर्चना करें I

3. गुरुवार को स्नान के जल में नागरमोथा नामक वनस्पति डालकर स्नान करें I

4. पीले रंग के पुष्पों के पौधे अपने घर में लगाएं और पीला रंग उपहार में दें I

5. गुर ---- more

Printer Friendly VersionEmail The Author 5:42 PM | #ज्योतिष

गुरु ग्रह के प्रतिकूल होने के

गुरु ग्रह के प्रतिकूल होने के लक्षण



गुरु के अनुकूल होने पर उपर्युक्त लक्षण प्रतीत होते हैं और जब गुरु जन्मपत्रिका में अशुभ स्थिति में होता है, तो निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं :

1. ऐसे व्यक्तियों को गुरु की महादशा- अन्तर्दशा प्रारम्भ होने पर मानसिक चिंता, आर्थिक हानि, स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी इत्यादि फल प्राप्त होते हैं I

2. ऐसे व्यक्ति की शिक्षा में अक ---- more

Printer Friendly VersionEmail The Author 5:39 PM | #ज्योतिष

गुरु ग्रह के अनुकूल होने के लक

गुरु ग्रह के अनुकूल होने के लक्षण



गुरु के अनुकूल होने पर जातक को उपर्युक्त वर्णित सभी क्षेत्रों एवं कारकों के संबंध में अनुकूल परिणाम प्राप्त होते हैं, लेकिन यदि गुरु अनुकूल नहीं है, तो उक्त कारकत्व सम्बन्धी कार्यों में हानि भी प्राप्त हो सकती है I गुरु के अनुकूल होने पर सामान्यत: निम्नलिखित लक्षण दृष्टिगोचर होते हैं :

1. ऐसे व्यक्ति को अध्ययन में अच्छी सफलता प ---- more

Printer Friendly VersionEmail The Author 5:38 PM | #ज्योतिष

केतु का रत्न लहसुनियां रत्न कब

केतु का रत्न लहसुनियां रत्न कब पहनना / धारण करना चाहिए
(Rahu and Its Gemstone Cat’s Eye Stone – Lahasunia)


केतु भी राहु के समान छाया ग्रह है और राहु के सामन ही क्रूर एवं नैसर्गिक पाप ग्रह है | पाप ग्रह होते हुए भी कुछ भावों में एवं ग्रहों के साथ केतु अशुभ परिणाम नहीं देता है | अगर कुण्डली में यह ग्रह शुभस्थ भाव में हो तो इस ग्रह का रत्न लहसुनियां धारण करने से स्वास्थ लाभ मिलता है | कार्यो में सफलता मिलत ---- more

Printer Friendly VersionEmail The Author 11:01 AM | #ज्योतिष

पुखराज रत्न कब पहनना / धारण करन

गुरू का रत्न पुखराज कब पहनना / धारण करना चाहिए (Jupiter and Its Gemstone Yellow Sapphire – Pukhraj)



ग्रहों के गुरू हैं बृहस्पति| पीत रंग बृहस्पति का प्रिय है| इनका रत्न पुखराज भी पीली आभा लिये होता है| व्यक्ति की कुण्डली में गुरू अगर शुभ भावों का स्वामी हो अथवा मजबूत स्थिति में हो तो पुखराज धारण करने से बृहस्पति जिस भाव में होता है उस भाव के शुभ प्रभाव में वृद्धि होती है| यह रत्न धारण करने से गुरू के ब ---- more

Printer Friendly VersionEmail The Author 10:58 AM | #ज्योतिष


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